कैसे आदमी हो तुम ?

किस अभागे संग बांधा मुझको मेरे रब्बा?

जिसके साथ रहकर

आगे सब अंधियारा है

आखिर क्यों बेटी ही को जाना होता है

घर बाबुल का छोड़कर ?

अपना आंगन सूना कर महकाना होता है

उसको इक पराया घर

जिसमें कोई भी तैयार नहीं

उसे अपनाने को फिर भी

जाने किसने ये रीत बनायी?

कि जीवन चाहे लाश बने पर

रहना होगा उसे

अपनों से दूर, गैरों के संग

जहां सब ही डराते हैं उसको

दिखाकर नित नए रंग |

आखिर ऐसा क्यों है ?

कि मौन रह सब कुछ सहती है वो

खून के आंसू रोज पीती है वो

फिर भी जब बोलती है कभी तो

पिया को रास नहीं आती है वो |

हां माना,

इक बेटी है परायी वो

मगर तुम लाए थे हाथ पकड़

तभी तो इस घर आई है वो

तो फिर

क्या कसूर रहा उसका?

कि तुम्हारा हर दोष;

तुम्हारी हर कमी;

मढ दी जाती है उसके सर,

छोड़ दी जाती है अकेले

जब अपनों से दूर कर |

बेबस,

खाने को ठोकरें दर बदर

सोचती हूं

कि काश तुमको भी कभी

ऐसे दिन देखने को मिलते

जब

तुम जिसे अपना मानते

वो तुम्हें ठुकराकर छोड़ देता

भटकने को सरेराह |

काश!

तुम भी गुजरते उन राहों से

जिन पर अपनी मर्दानगी के दंभ में

तुमने मुझे छोडा़ है |

काश!

तुम भी गुजरो

उन तन्हा निशाओं से

तुम भी सहमो

उन डर के सायों से |

वो सब

जो मुझे सौगात में मिले थे तुमसे |

काश!

एक दिन तुम भी गुजरो

उस हर अनुभव से

जो मुझे मिले हैं

तुम पर भरोसा करने के बदले|

कितने अभागे हो तुम

क्या नाम दूं तुमको

समझ न पाए जो

रब ने मोहब्बत का सागर भी दिया तुमको

कैसे आदमी हो तुम

साहिल पाकर भी

मंजि़ल हासिल नहीं

ये लगता है तुमको|

ज़ल्लाद भी शायद कांप जाए

इतना दर्द देने से पहले किसी को

मगर तुमको फर्क नहीं पड़ता

मेरे जा़र जा़र बहते अश्कों से भी |

कैसे आदमी हो तुम ?

हाय!

कैसे आदमी संग बांधा मुझको मेरे रब्बा Copyright © Rachana Dhaka

Published by Rachana Dhaka

I am a law student, a resilient defender of Human Rights, a nomad who loves to know about different cultures and connect them for the better future of mankind and loves to talk to people through poetry or with some write ups. And best of all i love to motivate people and spread happiness around :)

10 thoughts on “कैसे आदमी हो तुम ?

    1. ❤ Thank you so much for the kind appreciation!! This gives support. Actually this credit goes to my parents who kept me away from the shadow of patriarchal thought process and let me speak, so that I could understand the difference on my own and I am just trying to do that!! Will get to learn from great people like you now 🙂

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