न रास आया किसी को

आईना था सामने

मगर कोई सूरत नहीं

इस बात का गम था कि

आंखों में कोई मूरत नहीं ।

मकान तो था बहुत बड़ा यहां

पर न था मेरा घर कोई

पराए इस देश में आकर

लगा यहां न था मेरा सगा कोई ।

गम पीकर भी गीत गाए यहां

पर मिला न मन का मीत कोई

खुशदिल, खुशशक्ल, ज़हीन भी थे हम

मगर न रास आया किसी को कोई l Copyright © Rachana Dhaka

Published by Rachana Dhaka

I am a law student, a resilient defender of Human Rights, a nomad who loves to know about different cultures and connect them for the better future of mankind and loves to talk to people through poetry or with some write ups. And best of all i love to motivate people and spread happiness around :)

30 thoughts on “न रास आया किसी को

  1. सब मिलेंगे देखिए तो सही👌

    सुना है वक्त और उम्र दो ऐसे ख़ास होते हैं,
    जो कभी पास होते है, कभी एहसास होते हैं।

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    1. True… but jiske ebare me ye likha hai wo aadmi k sharir me rakshas h… dil patthar h uska… he can never think positively… if his wife tries to favour him… he thinks that this is some conspiracy, because he never think of helping her… jese khud bivi ko neeche dikhane k plans karta hai waise hi sochta hai doosra b ese karra hoga… i don’t know how his wife is tolerating him 😥

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      1. मैं समझ सकता हूँ आपकी भावनाओं को, समय और कर्म पर विस्वास रखिये जीवन चक्र में सब स्वीकार करना होता है। सब अच्छा होता बंधु

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      2. प्रसन्न रहिये बंधु😊

        बैठो कभी आईने के सामने और मुस्कुरा कर देखो,
        फिर भी ग़र मुस्कुराहट, आये ना हाथ तो मुख बनाकर देखो।

        तुम ढूढ़ लोगे उस शख्स को जिसे ढूढ़ते हो हर रोज़,
        ज़रा आईने की शख्सियत से इश्क़ फ़रमा कर देखो।

        वह इन्तिज़ार में किस के है, तुम पहचान लोगे,
        इश्क़ तुम्हें तुम्ही से है करना, जब मान लोगे।

        उस शख्सियत को इक दफ़ा गले लगा कर देखो,
         बैठो कभी आईने के सामने और मुस्कुरा कर देखो।

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      3. अगर जलन मेरे कारण होता है तो प्रसन्नता कहां मायने रखती है। जब कण-कण प्रसन्न रहेगा तभी एक सुंदर समाज का निर्माण होगा। मैं तो प्रयासरत हूँ इसी पथ पर। 🙏

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      4. मेरे समक्ष यह विपरीत है बंधु। समाज प्रसन्न तो मैं भी, एक अकेला प्रसन्न रह कर क्या करेगा वह तो मेरा स्वार्थ हो गया ना।

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      5. nana… apko jagker sabko jagana hai na… ye swarth nahi zimmedari hai… wastav me t akela insan agar swarthi ho to prasann ho hi nahi sakta hai jesa ki mere poem ka hero h… wife ko dukhi karke khud khush hona chahta hai… but ho kabhi nahi pata h… or ye sab poems mere ya mere dosto k real life issues per based hain

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      6. मैंने कविता को कहीं गलत नहीं कहा बंधु उसके लिए मैं माफ़ी चाहता हूं, मैंने अपने धारणायें रखीं बस। मेरे कहने का बस इतना मतलब है कि मेरा कर्म समाज मे प्रसन्नता फैलाना है और उसी में मेरी प्रसन्नता है।

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      7. मैं इतना नहीं सोचता बन्धु, प्रसन्न रहिये, आपकी सारी बातों से मैं सहमत हूँ 🙏

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      8. mai bhai apke sare vicharo se sahmat hu but ek do bate hum dono alag tarah se likhte h 🙂 but thats ok… bandhu ekdam ek jese honge to life boaring ho jayegi ,,, discussion ka b scope hona chahiye na 😀

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      9. जीवन मे डिस्कशन से बहोत दूर रहा हूं उसी में प्रसन्नता पाता हूँ, अकेले रहना और ख़ुद को जानना सबसे बड़ी प्रसन्नता है, आपका बहोत आभार आपने अपना वक्त दिया। 🙏

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