देश शब्द के मायने क्या हैं?


चलो आज विचार करते हैं कि जब भी देश शब्द ज़ेहन में आता है तो हमारे दिमाग में क्या आता है और क्या आना चाहिए?
जी हाँ, सही कहा आपने सबसे पहले तो हमारे देश का नक्शा आता है, उसके बाद? देश है क्या आखिर? भारत क्या है? आजकल अपने देश में बहस तेज हो गयी है कि देश ही सर्वोपरि है या मैं अपने भारत देश को प्यार करता हूँ.
तो हम वाक़ई किसको प्यार करते हैं? कौन है जो सर्वोपरि है?

क्या एक घर/पंछी/पहाड/नदियां/फूल/फल/आदमी/औरत/हिन्दू/मुस्लमान/ईसाई/पारसी/ज़मीन/आसमान/नेता/किसान/जवान/पानी/जाती/धर्म/कुछ और?
आखिर क्या है ऐसा जिसे हम इतना मानते हैं और इतना प्यारकरते हैं और जिसके नाम पर हर दिन इतनी बहस होती है?

जी हाँ, देश में वो हर चीज शामिल है जो ऊपर लिखी गयी है, माने यहाँ पैदा हुआ हर इंसान चाहे वो किसी भी लिंग/जाती/धर्म/रंग/संस्कृति का हो, एक देश की कानून द्वारा निर्धारित सीमा में आने वाला हर जीव/पेड़/पंछी/नदी/झरने/पर्वत/ सभी तरह के प्राकृतिक और कृत्रिम संसाधन, हमारी विभिन्न संस्कृतियां, बोलिया, धर्म, भाषा, या कानून की परिधि के अंदर जो भी हम सोच सकते हैं वो हर चीज मिलकर एक देश का निर्माण करती है.

अब सवाल आता है की फिर धर्म – जाती के नाम पैर ये रोज रोज की बहस क्यों है? हाँ, तो ये सब मिलकर हम एक देश यानि हम सब भारतवासी मिलकर ही जब अपने भारत को एक देश के रूप में पूरा करते हैं, हमारी साझी संस्कृति ही जब हमारी पहचान है तो फिर लड़ाई किस बात की और हम बात बात पैर हमारे ही परिवार के सदस्यों को दिवार के उस तरफ यानि दुसरे देश भेजने की बात क्यों कर देते हैं.
जाने अनजाने हम क्यों बिना बात आवेशित होकर अपने ही घर में दीवार खींचकर इसे मकान बनाने पर तुले हैं? क्योंकि घर घर उसके रहवासियों से होता है, दीवारों से तो मकान ही बनते देखे हैं.
और ये बात हमें अपने फौजी भाइयो से सीखने की ज़रूरत है.
जैसे हमारे फौजी भाई हमारी हिफाजत करते समय ये नहीं सोचते कि वो किसको सुरक्षित कर रहे हैं बल्कि वो अपने देश की परितधी और परिभाषा में आने वाली हर चीज की रक्षा करते हैं चाहे वो इंसान हो या संसाधन, तो फिर हमें लड़कर क्या मिलने वाला है. और अगर हम ही लड़ रहे हैं तो फिर वो सीमा पैर क्यों शहीद हो? उनको भी बुलाओ अंदर, वो भी अपनी ज़िंदगी हथेली पर लेकर चलने के बजाय आरा से जीए, सुकून की नींद ले, धर्म तो है ही हमें बचने के लिए काफी.

इसलिए मेरे प्यारे भाई बहनो आपसे निवेदन है कि जब हम कहते हैं कि हमें अपने देश से प्यार है तो हमें अपने फौजी भाईयो के जैसे ही बिना भेदभाव के प्यार करने की ज़रूरत है न कि गर के अंदर ही झगड़कर इसे खोखला करने की, क्योंकि जब हम झगरते हैं हैं हम (दोनों तरफ के लोग) एक देश विरोधी काम करते हैं, इसमें कोई सही नहीं दोनों ही गलत हैं. तो ऐसा काम क्यों करना?

देश मतलब हर भारतवासी, तो फिर भारतवासियो से नफ़रत मतलब देश का निरादर. एक बार हम देश का मतलब समझ जायेंगे तो ऐसा कभी नहीं करेंगे और आपस में भाईचारा ही हमअरे देश से प्यार को दर्शाता है, कृपया इसे बनाये रखने में सहयोग करे.

Copyright © Rachana Dhaka

10 Comments

  1. Aaj jo desh me bawal hai wah CAA KO lekar hai……jabki Ye kanoon clear hai….yahan n kisi jaati aur naa hi dharm ko lekar vivaad hai ….phir bhi log esey dharm se jodkar nafrat failana chahte hain unko aap kyaa kahenge……..

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  2. बिल्कुल सही कहा। प्रेम से बड़ा और श्रेष्ठ कुछ भी नहीं। हम आज भी प्रेम करते हैं मगर अब शायद प्रेम करने का कर्तव्य सिर्फ हमारा रह गया है तथा नफरत पर अधिकार उनका। यकीन नही तो पाकिस्तान से भागते विस्थापित हिंदुओ को देखो किसने भगाया?
    कश्मीर से भागते गैर मुस्लिमो को देखो किसने रुलाया। बहु बेटियों को किडनैप कर किसने रुलाया? इन सवालों का सटीक जवाब आप नही देंगे।
    मगर मैं बता दूँ मेरे दिल में अब भी प्रेम ही है और कुछ नही। जंग तो सिर्फ हमें बचाने की हो रही है न कि किसी को मिटाने की।

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    1. nahi sir maine ye ek taraf se nahi likha h dono taraf se likha hai jo bhi nafrat kar raha hai … aap ise ektarfa na le aapse yahi vinti hai … or mai pakistan ki nahi sirf hindustan ki baat kar rahi hu or yaha kashmir me julm karne walo k liye bhi mera message same h or UP me julm karne walo k liye bhi.
      or aap dekhiye maine kaha h or mai manti hu ki jab bhi larayi hoti h galti dono ki hoti hai… or mukhya baat ye hai ki mai sirf desh me kya aata hai wo baat kar rahi hu or aap bol rahe hain hum or wo to jese hi bante waise hi hum desh se alag baat karne lage… is baat per to maine kuchh kaha hi nahi to kya zawab du ??
      aap desh ki baaat kare to koi zawab b du.
      Please jo maine likha h us per swal kare usse itar apki marji h.

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