अंधियार ढल कर ही रहेगा: This darkness will go for sure!!

महाकवि पद्म विभूषण गोपालदास “नीरज” कहते हैं —

अंधियार ढल कर ही रहेगा

आंधियां चाहें उठाओ,
बिजलियां चाहें गिराओ,
जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा।

रोशनी पूंजी नहीं है, जो तिजोरी में समाये,
वह खिलौना भी न, जिसका दाम हर गाहक लगाये,
वह पसीने की हंसी है, वह शहीदों की उमर है,
जो नया सूरज उगाये जब तड़पकर तिलमिलाये,
उग रही लौ को न टोको,
ज्योति के रथ को न रोको,
यह सुबह का दूत हर तम को निगलकर ही रहेगा।
जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा।

दीप कैसा हो, कहीं हो, सूर्य का अवतार है वह,
धूप में कुछ भी न, तम में किन्तु पहरेदार है वह,
दूर से तो एक ही बस फूंक का वह है तमाशा,
देह से छू जाय तो फिर विप्लवी अंगार है वह,
व्यर्थ है दीवार गढना,
लाख लाख किवाड़ जड़ना,
मृतिका के हांथ में अमरित मचलकर ही रहेगा।
जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा।

है जवानी तो हवा हर एक घूंघट खोलती है,
टोक दो तो आंधियों की बोलियों में बोलती है,
वह नहीं कानून जाने, वह नहीं प्रतिबन्ध माने,
वह पहाड़ों पर बदलियों सी उछलती डोलती है,
जाल चांदी का लपेटो,
खून का सौदा समेटो,
आदमी हर कैद से बाहर निकलकर ही रहेगा।
जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा।

वक्त को जिसने नहीं समझा उसे मिटना पड़ा है,
बच गया तलवार से तो फूल से कटना पड़ा है,
क्यों न कितनी ही बड़ी हो, क्यों न कितनी ही कठिन हो,
हर नदी की राह से चट्टान को हटना पड़ा है,
उस सुबह से सन्धि कर लो,
हर किरन की मांग भर लो,
है जगा इन्सान तो मौसम बदलकर ही रहेगा।
जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा।

Another great Indian Poet – Padm Vibhushan Gopaldas Neeraj says —

Whether you bring storms

Or you shed lightening

The lamp is lightening now so the darkness will go for sure!!

Light is not the wealth to be kept in the strongbox locker

Nor it is the toy, price of which is asked by the customer

That is the smile of the sweat and the life of martyrs

When it gets too perplexed it brings the new sun out

Do not try to stop the upcoming light

Do not stop the procession of light

This messenger of the morning shall remove the dark night

The lamp is lightening now so the darkness will go for sure!!

When it Is youth, the air opens every veil

If you try to stop it, it will talk to you as a storm

It doesn’t know the law, it do not follow prohibitions

It keeps on jumping or running as clouds on the mountains

Shrink your net of silver

Take back your bleeding words

Human will definitely come out of the jail

The lamp is lightening now so the darkness will go for sure!!

Those who did not understand the time, had to go

If saved from sword, had to cut from the flower

How so ever large or difficult it is

Every stone has to give way to the river

Just have treaty with that morning

Do engage with every ray of light

If the human Is awake the weather will change for sure

The lamp is lightening now so the darkness will go for sure!!

Translation by Rachana Dhaka

4 Comments

  1. है जगा इन्सान तो मौसम बदलकर ही रहेगा।
    जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा।

    नीरज सर का कोई तोड़ नही 🖤

    Liked by 1 person

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