किसान हितैषी का चोला

किसान पुत्र राजेश भाई कहते हैं – राजनीति के अखाड़े में सबसे गजब का खेल इस समय किसानों के नाम पर चल रहा है। जिसे देखो वही विधायकों/सांसदों/बाहुबलियों को किसान हितैषी एवं जननायक घोषित कर रहा है। क्यों भई किसान हितैषी ये राजनीतिक बाहुबली लोग ही हो सकते हैं..?
कोई आम गरीब सज्जन क्यों नहीं हो सकता..?
अगर ये बाहुबली विधायक/सांसद इतने ही बड़े किसान हितैषी एवं जननायक थे तो किसानों व किसान पुत्रों के मन में इनसे इतनी नफरत क्यों है..?
किसी गरीब किसान की आत्महत्या के मसले पर कितनी बुलंद आवाज उठाई इन लोगों ने..?
गरीब किसान परिवार की कितनी आर्थिक मदद कर दी..?
कितने गरीब किसान बच्चों की रुकी हुई शिक्षा को अनवरत आगे बढ़ाया..?
जबर्दस्ती के किसान हितैषी व जननायक वो आपके हो सकते हैं..सम्पूर्ण किसान व मजदूर समाज के नहीं..
किसान हितैषी वो होते हैं जिन्हें खेती का ज्ञान हों..जिन्हें किसानों की दुर्दशा का ज्ञान हो..जो बिना पक्षपात किये समाज के हित को सर्वोपरि मानते हों..लेकिन जिन्हें वर्तमान राजनैतिक/सामाजिक माहौल के मद्देनजर किसान हितैषी व जननायक बनाया जा रहा है उनका उद्देश्य क्या था और क्या है कम से कम इसे तो समझ लीजिए..
समय की मांग के अनुरूप जातिगत राजनीतिज्ञों को जननायक का चोला जबर्दस्ती पहनाने से दूरगामी लाभ नहीं मिलेगा..ये लोग किसान, मजदूरों को केवल चुनाव में वोट के रूप में उपयोग करेंगे फिर वापस जहां से चलें हैं वहीं पहुंच जाएंगे..!
✍ राजेश कुमार मंगावा

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