श्री राजेश कुमार मंगावा

बाँसुरी से सिख ले सबक ए जिंदगी,
छलनी है सीना फिर भी मधुर गुनगुनाती है !!

यह वाक्यांश श्री राजेश कुमार मंगावा पर यथार्थ चरितार्थ होती है| श्री राजेश कुमार मंगावा पर लिखी यह कहानी एक ऐसे बालक की असाधारण प्रेरणादायक कथा है, जिसे हर किसी को पढना चाहिए| वह साधारण सा दिखने वाला बालक अपने जीवन में इतनी कठिनाईयों का सामना करता है, जिसका किसी व्यक्ति के लिए भी अनुमान लगा पाना कठिन ही नहीं अपितु असंभव है| यह कहानी विद्यार्थियों को ही नहीं, अपितु हर आयु वर्ग के व्यक्ति को प्रेरित करती है| श्री राजेश कुमार मंगावा की कहानी पढने के बाद यही संदेश मिलेगा कि हमें हर क्षेत्र में अपने जीवन में भी कभी हार नही माननी चाहिए| कठिनाइयों का सामना साहस तथा उत्साह के साथ करते हुए अपने उद्देश्य की ओर बढ़ना चाहिए| जीवन में कुछ कर गुजरने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए यह एक अत्यंत प्रेरणादायी कहानी है|

आज की कहानी में हम बात करते हैं सीकर की. ये है भारत देश के राजस्थान राज्य का एक जिला, जो शिक्षा और संसाधनों में अग्रणी माना जाता है और बहुत से किसान के बेटे इस मिट्टी की कोख में पैदा होकर आज भारत माता की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं| ये वो क्षेत्र है जहां से बहुत से माँ के लाल देश के लिए शहीद हुए हैं|

कभी कभी ज़िन्दगी हमें बहुत सारे जख्म देती है और हम सोचते हैं कि अब बस!! और न हो पायेगा हमसे!! फिर वक़्त आता है जब हम में से कुछ लोग अंतिम सत्य, मौत, को चुन लेते हैं और कुछ विषम जीवन से जूझने को ही अपना मुकाम बना लेते हैं|

जी! ऐसा कतई नहीं है कि ये खुद झेलकर खुदगर्ज हो जाये! हरगिज नहीं, ये वो शख्स होते हैं जो हर तरह के कांटो पर चलते हैं और वो मांझी होते है जो हर पत्थर को काट कर खुद भी आगे बढ़ते हैं और भावी मुसाफिरों के लिए भी रास्ता सुगम बनाते चलते हैं|

जी हाँ, मैं आज इस धरा के सपूत राजेश कुमार मंगावा की बात करने जा रहा हूँ, माताजी की बीमारी के चलते उनका परिणय बाल उम्र में करना पड़ा, फिर खेलने खाने के दिनों में जब बच्चे पिताजी की पीठ पर झूलते हैं, उनको माताजी- पिताजी को कन्धा देना पड़ा| बहुत ही कठिन परिस्थितियों में बीता इनका बचपन जब एक तरफ जन्मदाता का सहारा खोने का ग़म तो दूसरी तरफ रिश्तेदारों के ताने, असहयोग, सामाजिक क्लेश और घर की जिम्मेदारियां, और बीच में एक अकेली नन्ही सी जान| कहाँ जाये? क्या करे? सब समझ के बाहर| अभी तो ठीक से आँखे खोलकर जीना भी नहीं सीखा था कि दुनियादारी के बोझ तले एक भोली सी मुस्कान का निर्मम क़त्ल हो चुका था| दूर तलक सुनने वाला कोई नहीं, ऐसे में आवाज़ भी दे तो किसको?

मेरे तो लिखते हुए भी हाथ कापने लगे हैं; परन्तु आप तक श्री राजेश कुमार मंगावा के संघर्षो को पहुँचाना भी ज़रूरी है, जिन्होंने इन लम्हों को जीया है| क्योंकि वो एक ऐसा इंसान है जो गरीब/पीड़ित/शोषित/जरूरतमंदो के हर सुख दुःख में उनके साथ खड़ा होता है और हर इंसान का सम्बल होता है| कितने ही भाई बहनो को इस इंसान ने खुद को सौपान बनाकर ऊपर के पायदान पर पहुँचाया है और वह भी बिना किसी लोभ/अहंकार/एहसान के नि:स्वार्थ भाव से|

इन सब के साथ एक और तबाही इनको झेलनी पड़ी जब इन्होने समाज सेवा के क्षेत्र में कदम रखा और वो थी पुलिस प्रशासन की वक्रदृष्टि, जिसकी वजह से इनको अनावश्यक कष्टों का सामना करना पड़ा| प्रशासन की तो जैसे ये आँख की किरकिरी बन चुके थे, हालाँकि आज वो सब इस इंसान की शख्शियत को सलाम करते हैं और संघर्षों का लोहा भी मानते हैं; परन्तु इन उजालों की राहे बहुत ही अँधेरी और खौफनाक थीं| ऐसे इंसान का जिक्र न करना तो उनके कामों की भी तोहीन होगी और मानवता की भी| इसलिए ही इनके लिए कहा गया है|

“जो अंधेरी राहों में जुगनू और बेसहारों का सहारा है।
जो बेजुबान की आवाज़ और खोई कश्तियों का किनारा है।।”

श्री राजेश कुमार मंगावा, जो ऐसे गाँव गोडावास, नीम का थाना से आते हैं जहाँ से इनके पहले समाज सेवा के क्षेत्र में दूर दूर तक कोई नाम नज़र नहीं आता|

मुझे फक्र है इस दिव्य मानव पर क्योंकि इन्होंने अपने अच्छे व समाज सेवा के कार्यों से गांव ही नहीं बल्कि पूरे सीकर जिले की युवा पीढ़ी के सामने एक मिशाल पेश की है कि हर तरह की कठिन परिस्थितियों से जूझने के बावजूद आप अच्छे इंसान बने रह सकते हैं और एक उदहारण पेश कर सकते हैं| श्री राजेश कुमार मंगावा जो नीमकाथाना क्षेत्र में किसी परिचय के मोहताज नहीं| अपनी निस्वार्थ सेवा भावना एवं कार्यशैली से प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में इनके प्रति अपार सम्मान एवं स्नेह व्याप्त हैं| इनके द्वारा सामाजिक क्षेत्र में अनेकों ऐसे अद्वितीय कार्य किए गए हैं जिनकी सामान्य मानवी द्वारा यथार्थ में कल्पना कर पाना भी मुश्किल है, अनेकों संकटों का सामना करने के बावजूद भी इन्होंने पीछे पैर नहीं रखें| समाज में व्याप्त बुराई मिटाने एवं जनसाधारण की समस्या के लिए बिना किसी अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थितियों की परवाह किए इनके द्वारा अनेकों बार बड़े स्तर तक का आंदोलन भी किया गया और सफलता भी पाई|
श्री राजेश कुमार मंगावा द्वारा बालिका शिक्षा, भ्रूण हत्या का घोर विरोध, निर्धन एवं असक्षम बालिकाओं की शिक्षा एवं फाउंडेशन कोर्स के लिए आर्थिक मदद, बालिकाओं एवं महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के लिए अनेकों बार क्षेत्रीय प्रशासनिक अधिकारियों को संख्याबल के साथ अवगत करवाया, बालिकाओं को उनके मूलभूत अधिकार एवं संवैधानिक अधिकार के बारे में स्कूल स्कूल जाकर अवगत करवाया, निर्धन परिवार की बेटियों की शादी में अपेक्षित आर्थिक मदद की, निर्धन बहनों के लिए स्वयं श्रीकृष्ण भगवान बनकर अपनी टीम की मदद से भात भरे, न्याय से वंचित परिवारों के लिए उच्च स्तर तक की विधिक सहायता आपके द्वारा दिलाई गई जिसका पीड़ित परिवार परिकल्पना भी नहीं कर सकता था|
एक बार मेरे द्वारा उनके द्वारा की जा रही समाजसेवी विचारधारा के बारे में पूछा गया तो श्री राजेश कुमार मंगावा ने बताया कि अगर पुराणों के अनुसार व्यक्ति को 84 लाख योनियों बाद मानव जीवन मिला है तो निश्चय ही इसे प्राणीमात्र की सेवा के लिए समर्पित कर देना ही श्रेष्ठ विकल्प है| इनके द्वारा छेड़ी गई एक अनोखी मुहिम जीवनधारा मेडिकल हेल्प भी करीब 3 वर्षों पूर्व से ही अनवरत संचालित है जिसके द्वारा जरूरतमंदों के लिए आवश्यकतानुसार रक्त उपलब्ध कराया जाता है, इस पुनीत कार्य के लिए भी इनकी टीम समर्पित भाव से निस्वार्थ सेवा में जुटी हुई है| जिसमें करीबन 1000/से ज्यादा लोगों को रक्त उपलब्ध करवानें में कामयाबी हासिल की है| इनके द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनेकों पेड़ पौधे लगाए है तथा अनेक अभियान भी चलाये हैं, गंभीर बीमारी से जूझ रहे गरीब, असहाय लोगों का अपने खर्च से बड़े- बड़े ईलाज करवायें है, अपराधों, भिक्षावृति, बालश्रम में लिप्त, घुमंतू एवं झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले वंचित सैकड़ो बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का काम भी इन्होंने किया है|

आपने स्वयं व कुछ और आस पास के लोगों से सहायता लेकर जरुरत के मुताबिक लगभग 300 शहीद परिवारों का सहयोग किया है जैसे उनके बच्चों की पढाई या राशन या कानूनी सहायता या परिजनों के स्वास्थ्य संबंधी सहायता।

सामाजिक क्षेत्र में किए गए इनके उत्कृष्ठ कार्यों की गूंज राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुकी है|

अवार्ड्स:

  1. गांधी शांति पुरस्कार, राष्ट्रीय सम्मान।
  2. जय हिंद ह्यूमनटी अवार्ड, राष्ट्रीय सम्मान।
  3. इंड़ियन रियल हीरोज, राष्ट्रीय सम्मान।
  4. कैवलय सेवा समिति जोधपुर द्वारा राज्य के बेहतर समाजसेवी के तौर पर सम्मान।
  5. फतेहपुर विकास संस्थान द्वारा राज्य के बेहतर समाजसेवी के तौर पर सम्मान।
  6. रक्तदान के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए अनेकों बार कई बड़े मंचों पर सम्मान।

लिखने को बहुत कुछ है पर उन शब्दों की कमी है जिनसे आज के इस दौर के इस युवा दिव्य शक्ति भाई राजेश कुमार मंगावा के प्रभावशाली व्यक्तित्व एवं निस्वार्थ सेवाभाव पर प्रकाश डाला जा सके|

*यह लेख कुछ मैंने लिखा है कुछ अलग अलग महानुभावों के सोशल मीडिया पर की गयी टिप्पणियों व लेखों का संकलन है।

Published by Rachana Dhaka

I am a law student, a resilient defender of Human Rights, a nomad who loves to know about different cultures and connect them for the better future of mankind and loves to talk to people through poetry or with some write ups. And best of all i love to motivate people and spread happiness around :)

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