#पर्सनल_सुरक्षा #personal_security

भाई #प्रेमाराम_सियाग की कलम से Summary in English is at the end of the post

Original post taken from https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1801295370036310&id=100004675922260

“वल्लभगढ़ में छात्रा की हत्या व पानीपत में एक महिला पर तेजाब फेंकने की घटना के बाद हरियाणा के गृहमंत्री का बयान आया कि सबको सुरक्षा देना संभव नहीं है।18सितंबर 2017 में दैनिक जागरण अखबार में पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के हवाले से लिखा गया कि देशभर में प्रति 663 लोगों की सुरक्षा में एक पुलिस का जवान तैनात है।

देशभर में पुलिस बल की कुल संख्या 19.26 लाख है और तकरीबन 5 लाख पद रिक्त पड़े है।जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में पुलिस का लवाजमा बढ़ना चाहिए मगर यहां हालात बिल्कुल उलटे है।

एक आंकड़ा दुनियाँ के कुछ देशों में वीआईपी स्टेटस व सुरक्षा का भी देख लेना चाहिए।ब्रिटेन में कुल 84 लोगों को वीआईपी स्टेटस मिला हुआ है।फ्रांस में 109 व जापान में 125 लोग वीआईपी स्टेटस के दायरे में है तो जर्मनी में 142,ऑस्ट्रेलिया में 205,अमेरिका में 252 व रूस में 312 लोगों को यह दर्जा हासिल है।भारत के पड़ौसी व जनसंख्या-क्षेत्रफल में बड़े देश चीन में मात्र 435 वीआईपी दर्जा हासिल लोग रहते है।

एक जुलाई 2018 को तवलीन सिंह के हवाले से लिखा गया है कि भारत मे कुल 5,79,092 वीआईपी रहते है।2015 में भारत सरकार ने यूएस एयरपोर्ट पर फ्री एंट्री के लिए 2000वीआईपी लोगों की लिस्ट बनानी शुरू की मगर यह लिस्ट लंबी होते-होते 15000के आंकड़े को पार कर गई।

भारत मे वीआईपी सुरक्षा को लेकर भी श्रेणियां बनी हुई है।14 लोग वीवीआइपी की श्रेणी में जिनकी सुरक्षा में 551 एनएसजी कमांडों तैनात रहते है व साथ मे अर्धसैनिक बलों के जवान भी।Z+श्रेणी की सुरक्षा 26 लोगों को दी हुई है।प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा में 55 जवान हर समय उनकी सुरक्षा में तैनात रहते है।Z श्रेणी की 58 लोगों को सुरक्षा दी गई है और प्रत्येक व्यक्ति के लिए 22 जवान हर शिफ्ट में सुरक्षा में तैनात है। Y+श्रेणी की सुरक्षा अर्थात 11 जवानों के सुरक्षा घेरे में रहने वाले लोगों की संख्या 144 है।बाकी Y व X श्रेणी जिसमे क्रमश 2 व 1 जवान हमेशा सुरक्षा के लिए साथ रहते है।आमभाषा में लोगों के बीच कोई वीआईपी आता है तो उनके साथ जो हथियारबंद जवान होता है उसे पर्सनल बॉडी गार्ड/गनर आदि कहा जाता है।

राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति,राज्यपाल, प्रधानमंत्री ,मंत्री,न्यायाधीश,लोकसभा, राज्यसभा,विधानसभा के अध्यक्ष,मुख्यमंत्री से लेकर विधायक तक वीआईपी के श्रेणी में आते है और अलग तरह के सुरक्षा चक्र में रहते है।बीपीआरडी की रिपोर्ट के मुताबिक सर्वाधिक सुरक्षा व्यवस्था वाले लोगों की संख्या 20,828 है जिनकी सुरक्षा में 56944 जवान हर समय तैनात रहते है।अगर 3शिफ्ट में ड्यूटी मानी जाए तो तकरीबन डेढ़ लाख जवान तो इन 21हजार वीआईपी लोगों की सुरक्षा में लगे हुए है।इनमें से सबसे ज्यादा बिहार,पंजाब,कश्मीर व यूपी में रहते है जहाँ सर्वाधिक अशांति रहती आई है।

पुलिस सुधार को लेकर कई बार मांग उठी,पुलिस सुधार आयोग बने मगर गरीब भारत मे वीआईपी इंडिया वाले लोगों ने अपने लिए अलग सुरक्षा घेरा बना लिया है इसलिए आमजन के साथ हो रहे अपराध की उनको खास चिंता नहीं है।दुःख की बात है कि यहां करोड़ पति बाबाओं,धार्मिक संगठनों के मुख्याओं,अरबपति कलाकारों तक को अलग तरीके से सरकार जनता के पैसे खर्च करके सुरक्षा देती है जबकि गरीब,लाचार इंसान की हत्या,बच्चियों के साथ दरिंदगी,भीड़ द्वारा इंसानों की हत्या सरीखे जघन्य अपराध पर टका सा जवाब होता है कि हम सबको सुरक्षा नहीं दे सकते।लोकतंत्र के नाम पर बीहड़ों से निकलकर वीआईपी रुतबा हासिल किए लोगों से जनता सुरक्षा व शांति की उम्मीद किये बैठी है।बेमानी है।

हरियाणा के गृहमंत्री को निर्लज्जतापूर्वक बयान देने से पहले सोचना चाहिए कि पुलिस का इकबाल कैसे खत्म हो गया कि दिनदहाड़े वहशी दरिंदे गोलियां चला रहे है,तेजाब फेंक रहे है?शाम को जब शांति से बैठे तो सोचना चाहिए कि क्या पुलिस सुधार के लिए कुछ किया जा सकता है?क्या वीआईपी घेरे में घुसे लोगों की संख्या कम करके इनकी सुरक्षा में लगे लोगों को हटाकर स्कूल/कॉलेज के आसपास तैनात किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी वीआईपी कल्चर खत्म करने का नारा दिया करते थे उसका क्या हुआ?2000रु. की लाल बत्ती गाड़ी से उतारकर रखने से जनता का बोझ हल्का नहीं होगा बल्कि ये सफेदपोश वीआईपी जो पुलिस वालों को अपने साथ लिए घूमते है,उनको फ्री करके जनता की सुरक्षा में लगाया जाएगा तब मन से डर का बोझ कम होगा।

प्रेमाराम सियाग”

This article talks in the reply to the Home Minister of Haryana Anil Vijay saying that the police is not to give personal security to everyone. Actually people are getting murdered outside schools or public places (recently one girl was murdered for denial to the one sided love).

In reply the author talks rationally with data, first about the number of police personnel in India and vacant seats first and then it talks about how many VIPs in the world and India and then it tells that how the police services are being overly misused at the cost of taxes paid by the common man of India in the security of people who don’t actually need it that much but they register themselves as VIP or VVIP and get different kind of security and waste the resources while (many times) themselves spreading crime. There are more than 15000 people listed as VIPs from India at the US airport and s per the photo down you can see India has many times one VIPs than the combined of the whole world. 🤐 (5,79,092 it says)

And finally it says that if this can be dismissed and the police can be deployed outside the public gathering places or the places like schools or hospitals or universities or any other place where women or common man may need it, then the problem of social security shall be solved and none will need personal security. Also the crime rate will be reduced.

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