बच्चों की पढने में रुचि बढाऐं

आप सोच रहे होंगे कि इस कविता से कैसे रुचि बढेगी इससे तो बच्चा कुछ सीख भी नहीं रहा है।

तो वो ऐसे कि बच्चे को आगे बढने के लिए केवल नैतिक बातों की ही नहीं बच्ची सोचने, समझने और कल्पनाशीलता की भी जरुरत होती है और उसके लिए मदद करतीं हैं ऐसी ही कविता या लेख जो या तो बच्चे को जीवन के अनुभव या छोटी छोटी बातों से मेल खाती दिखाई दें जहां उसकी समझ जाती है या फिर उसकी समझ वाला सरल रोमांच व रहस्य उत्पन्न करने वाली किताबें।

क्योंकि जो बच्चों के स्तर से ऊपर होगा वो उनको बोझ लगेगा। और अनका उत्साह खत्म करेगा। इसलिए जरूरी है कि उनकी सीखने की ललक बनी रहे और उनको नाना प्रकार के अनुभव मिल सकें। ताकि वो पढाई (स्कूली शिक्षा) के साथ साथ पढना (स्वयं के लिए बिना परीक्षा के डर से पढना जहां उनकी विचार शक्ति को बल मिले) भी जारी रखें। इससे वे इस अपनी दुनिया को उलट पलट कर देख पाएंगे और अपने हिसाब से पुनः जोड पाएंगे।

इसलिए कयी बार हम कहानी या नोवल पढते बच्चों को अनावश्यक ही फटकार देते हैं। बल्कि हमें उनको पाठ्य पुस्तकों के अलावा भी कहानियों, चित्र कथाएं, पहेलिया, जोड़ तोड़, रंगों, लक्ष्यों, कौतूहल, आदि विभिन्न प्रकार की अलग अलग लेखकों की पुस्तकें उपलब्ध करानी चाहिए और इतना ध्यान रखें बस कि कोई गलत (अपराधिक प्रवृत्ति वाली) किताब न हो, उसके अलावा इन बिना जानकारी वाली किताबों से उनकी रुचि बढती है और तार्किक क्षमता भी। यही बात दादी नानी की कहानियों में भी है, जो पूरी दुनिया में लगभग एक जैसी होती हैं क्योंकि मनुष्य का बुनियादी विकास एक तरीके से ही हुआ है।

6 Comments

      1. Yes, I read it few days ago. Very interesting. I agree on many points: in my country education tends to be very pedantic and doesn’t give people critical thinking, it tends to be focused on studying little pieces or reality rather than give people a bird’s eye view.
        Even the high educated elites lack the ability to implement their very theoretical knowledge into real life as you correctly noted….

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        1. That’s true… Even i have seen many educated from first then post graduated from England but no change in the thought process still 🤐🤐… Thanks for reading and the kind insights 🙏😊😍

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