गैरों के भरोसे किसके घर बसे हैं?

एक दिन यूं ही परायों के देश में अपनों से दूर अंधेरे में बैठकर महसूस हुआ कि इस अनजान शहर में अंधेरे कितने अपने लगते हैं जहां किसी और को अपना कहने का अधिकार ना हो वहां उजाले भी कितने पराए लगते हैंl क्योंकि वो दिखा देते हैं कि तुम अपने शहर में नहीं गैरContinue reading “गैरों के भरोसे किसके घर बसे हैं?”

न रास आया किसी को

आईना था सामने मगर कोई सूरत नहीं इस बात का गम था कि आंखों में कोई मूरत नहीं । मकान तो था बहुत बड़ा यहां पर न था मेरा घर कोई पराए इस देश में आकर लगा यहां न था मेरा सगा कोई । गम पीकर भी गीत गाए यहां पर मिला न मन काContinue reading “न रास आया किसी को”

ठिकाना कहां है?

यह शाम ढलती जा रही है और इस पराए देश में बर्फबारी के बीच लाल सूरज को भरी दुपहरी ढलता देख मेरी सांसें जैसे रुकती जा रही है परिंदे तो छोड़ो यहां तो मेरे आशनां पेड़ों के पत्ते भी महीनों से नहीं देखे सिर्फ गाड़ियों के गुल है चारों तरफ बाकी सब सुनसान हैं बसContinue reading “ठिकाना कहां है?”

सोच रही हूं

आज यहां बैठी हूं मैं दुनिया के इक कोने में अपनों से भी दूर हूं और सच पूछो तो अपने से भी दूर हूं | किसी पराये को अपनाने की भूल कर बैठी थी, तभी तो आज इस ठिठुरती सर्द दुपहरी में अनजान भीड़ के बीच जब दिन ढल रहा है बर्फिली बारिश के बीचContinue reading “सोच रही हूं”

कैसे आदमी हो तुम ?

किस अभागे संग बांधा मुझको मेरे रब्बा? जिसके साथ रहकर आगे सब अंधियारा है आखिर क्यों बेटी ही को जाना होता है घर बाबुल का छोड़कर ? अपना आंगन सूना कर महकाना होता है उसको इक पराया घर जिसमें कोई भी तैयार नहीं उसे अपनाने को फिर भी जाने किसने ये रीत बनायी? कि जीवनContinue reading “कैसे आदमी हो तुम ?”

युवा कैसा हो?

आज का यक्ष प्रश्न ये है कि आज का युवा कैसा हो? वो क्या करे? क्या सोचे? कैसा दिखे? कैसा चले? कि दुनिया को रह दिखा सके. चलो, आज हम बात करते हैं चलो, आज हम विचार करते हैं कि किन चीजों को छोड़े और किनको अपनाये? जो हमारे युवा की सूरत बताये. आज काContinue reading “युवा कैसा हो?”

मैं सोच रही थी

हाँ तो, मैं सोच रही थी, की कुछ लिखा जाये, मगर!, मुद्दा ये है कि, मुद्दे इतने हैं कि, किस मुद्दे पर लिखा जाए, समझ नहीं आ रहा. देश की दशा- दिशा ही कुछ ऐसी चल पड़ी है, कि हवा का रुख भी समझ नहीं आ रहा. एक आग बुझने से पहले दूसरी सुलग जातीContinue reading “मैं सोच रही थी”

कौन है वो ?

कौन है वो ? जो रोज सपनो में है आता, कभी मुस्कुराता, कभी गुनगुनाता, कभी रूठ जाता, कभी मना लेता, कभी मेरी बातो से खफा होता, तो कभी सयाना बन जवाब दे देता. कौन है वो? जो हर पल है याद आता, खुद को जो मेरा, और सिर्फ मेरा बताता, मुझको भी नसीब पर मेरे,Continue reading “कौन है वो ?”